day4. Cycle experiment in netherland.

हम इंडियंस को साइकिल चलाने में शर्म आती है। लेकिन इस दुनिया में एक ऐसी भी कंट्री है जहां की आधी से ज्यादा पॉपुलेशन साइकिल पे डिपेंडेंट है और वह साइकिल ही चलाते हैं। उस कंट्री का नाम है नीदरलैंड्स। लेकिन इतना डेवलप्ड होने के बावजूद भी वहां के लोग साइकिल क्यों चलाते हैं? देखिए 1970 और 80 के समय नीदरलैंड्स में रोड एक्सीडेंट्स बहुत ज्यादा होने लगे थे। लोग अपनी जान गवा रहे थे। स्पेशली बच्चे वहां के लोगों ने आके स्ट्रीट्स पे प्रोटेस्ट किए। रोड पे प्रोटेस्ट किए और उन्होंने ये नारे लगाए कि बच्चों का कत्ल करना बंद करो। उसके बाद वहां की गवर्नमेंट ने बहुत ज्यादा बोल्ड डिसीजंस लिए। वहां पे साइकिल लेंस बनाई गई। वहां का पूरा ट्रैफिक सिग्नल दोबारा से रिीजाइन किया गया और वहां पर गाड़ियों को हटाकर साइकिल को प्रायोरिटी ज्यादा दी गई। यह एक तरह का सोशल एक्सपेरिमेंट था जिसमें कार्स और गाड़ियों को छोड़कर साइकिल को प्रायोरिटी दी गई। आज नीदरलैंड्स दुनिया की सबसे ज्यादा साइकिल फ्रेंडली और सेफ कंट्री है। वहां पर पॉपुलेशन कम है। वहां का हेल्थ केयर सिस्टम बढ़िया है और वहां की जो रोड्स हैं वो ह्यूमन फ्रेंडली हैं। कहते हैं ना जहां पर लोगों का प्रेशर और विज़न हो वहां पे गवर्नमेंट्स को अपने डिसीजंस बदलने ही पड़ते हैं। नीदरलैंड्स ने हमें यह दिखाया कि रोड सिर्फ गाड़ियों और कार के लिए नहीं होती बल्कि रोड्स इंसानों के लिए भी होती हैं। जहां आज हम गाड़ियों को स्टेटस सिंबल मानते हैं। वहीं नीदरलैंड्स ने साइकिल को एक्सेप्ट करके दुनिया के सामने एक नया मॉडल पेश किया

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