[संगीत] मटर गश्ती खुली सड़क में तगड़ी तड़क भड़क में वो ले गिरे सुलगते से सुलगते से सड़क में छतरी ना थी बकल में आया ही ना अकल में के भागे हम या भीगे हम अकड़ में तो सोचा फिर गीला हुआ है जो सुखाना ओ हो हो चाहे जनाना या मर्दाना ओ हो हो हो अटेंशन
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