About Dr. D’Pankar Banerji MS (ObGyn)Consultant Gynecologist with special interest in Reproductive medicine and Fetal medicine. and Ideal fertility IVF and Genetic centre pvt Ltd Jabalpur, Madhya Pradesh India.
http://www.idealfertility.com
Call/WhatsApp: +91- 7415553333

Dr. D’Pankar Banerji is the scientific director of Ideal Fertility: ICSI IVF and Genetic centre, a world class facility for Advanced Fertility treatment and Prenatal Genetics for care of Unborn baby.
Best thing about this centre is
1. Full time In-house Embryologists A.Dr. Rinku Banerji, a qualified pathologist and Embryologis( Master in Clinical EMB from Leeds UK, and, B. Ms.Ishani Banerji, a qualified Embryologist( Masters in clinical emb from Leeds UK and DNA molecular biologist. They maintain the quality control of IVF lab 24×7., Thus better blastocyst conversion and best IVF success rate.
2. All investigations like Follicular monitoring, hormone blood tests at one place. You don’t have to go anywhere.
3. Ovum pickup, embryology, embryo transfer, embryo freezing, egg freezing, male infertility checkup, TESA, ICSI are at one place.
4. Endoscopic procedures, Monitoring of early pregnancy at one place, with facility of first trimester screen, NT scan, Target scan and amniocentesis and CVS.

FERTILITY TREATMENT:
Dr. D’Pankar Banerji is well known fertility specialist in country and well versed doctor in field of Andrology and male infertility problems. He has mastered in cell culture methods and biotechnology in his post graduate research “Prenatal diagnosis of chromosomal anomalies by Chorion villus biopsy”, thus a soilid hold in the field of Embryology, Cell biology and IVF techniques.
He is “pro non-donor” in fertility treatment.
He is regularly helping Azoospermia (nil sperm in semen) males, by doing thorough Andrological evaluation, so that they can father their child biologically. Doing Testicular sperm extraction (TESE/TESA).
He takes the case of Low AMH (poor ovarian reserve) cases as challenge. If periods are regular, then he takes the chance by patient’s own eggs, even they are less, by applying various methods of ovarian stimulation, like Duostim, Ovarian rejuvenation, Segmentation if IVF cycle etc. to achieve #pregnancy
Dr. Banerji is regularly doing Laparoscopic and Hysteroscopic surgeries for fertility enhancement to achieve pregnancy in treating couples.
Running regular #biotechnologyteachingcourses : “University to Industry” orientation courses for life sciences University students.
GENETICS :
He is very much involved in #Geneticcounseling and prevention of genetic disorders in newborn. #Genetics is his passion. In this centre he is performing relgular first trimester screen in early pregnancy by biochemical tests and Nuchal Translucency (NT) scanning. Target or TIFFA scan is also covered by him
He is regularly doing invasive ultrasound procedures like #Amniocentesis and Chorion villus sampling (CVS) as diagnostic method to confirm irregularities found in Double marker or Triple/Quad marker screening
You can find us on
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हमारा जो जेनेटिक लैब है मतलब जो थर्ड फ्लोर में जो हमारा जेनेटिक सीक्वेंसिंग लैब है और डीएनए पीसीआर लैब है बेसिकली मैं यह समझाना चाहता हूं कि उसमें हम करते क्या हैं हमारे पास में जेनेटिक लैब में दो पार्ट हैं एक है जिसमें हम इनफेक्शन करते हैं इनफेक्शन का मतलब यह होता है कि जो रेस्पिरेटरी मतलब खांसी वाले इनफेक्शन हुआ कोविड हुआ बुखार हुआ पेट खराब हो गया डायरिया हो रहा या फिर बहुत सारे जो मेनिजाइटिस हुआ तो ये जितने भी होते हैं इनमें बैक्टीरिया वायरस और प्रोटोजोआ यह इनफेक्शन से होते हैं तो एक पार्ट यह हो गया इंफेक्शन का और एक हो गया जेनेटिक अब बहुत इंपॉर्टेंट चीज है यह सुनना है किसी भी जेनेटिक में यदि आप किसी सेल लो किसी भी व्यक्ति का किसी भी ऑर्गेनिज्म का कुत्ता बिल्ली किसी का भी तो उसमें जब हम यह टिश्यू लेते हैं या उसका ब्लड लेते हैं तो उसमें हमको बहुत सारे सेल मिलते हैं वह जो सेल है उस सेल को यदि आप बड़ा करोगे तो सेल के भीतर एक न्यूक्लियस मिलेगा इस न्यूक्लियस के भीतर डीएनए मिलेगा एक डीएनए मदर का एक डीएनए फादर से आता है और यह सारे प्राणियों में मिलेगा अब येकि एक हम ह्यूमन जेनेटिक लैब चलाते हैं तो यह ह्यूमन मनुष्य का है उसके सेल का अब ऐसे ही जो इस तरफ के लोग हैं इंफेक्शन में बैक्टीरिया मान लीजिए टीबी का बैक्टीरिया हुआ मान लीजिए एचआईवी का वायरस हुआ मान लीजिए हेपेटाइटिस बी का वायरस हुआ मान लीजिए सिफलिस का स्पायरोकिट हुआ तो ये जितने मैं नाम बोल रहा हूं ये भी इनमें भी जीवन है यदि इनमें जीवन है तो इनमें भी सेल है किसी में सेल वॉल बैक्टीरिया में सेल वॉल नहीं रहता वायरस में बट एक कवरिंग रहती है उस कवरिंग के भीतर इसका भी डीएनए होगा अब हम किसी भी व्यक्ति की पहचान चाहे वो टीबी का बैक्टीरिया हो एचआईवी हो चाहे वो मेरा हो चाहे किसी का भी हो उसकी पहचान उसके नाम से होती है फिर नाम के बाद उसके एड्रेस से होती है फिर उसके पिताजी के नाम से होती है फिर उसके बाद में उसका ब्लड ग्रुप क्या है या फिर उसका ऐसे करके एक आइडेंटिटी बनती है ऐसे आइडेंटिटी वाले वर्ल्ड में कई तरह के लोग मिल जाएंगे तो आप ए की जगह बी को पकड़ लोगे तो आपको और आइडेंटिटी पक्की करनी है तो क्या करते हैं अंगूठे का या फिर फिंगर के जो फिंगरप्रिंट्स होते हैं उनको देखते हैं ये बहुत अनकॉमन होते हैं दोनों में मिलने में और प्रॉब्लम यह होती है कि यदि मान लीजिए किसी ने सिलिकॉन का ग्लव्स पहन लिया या फिर यह ठीक से नहीं आया तो आप फिंगरप्रिंट से उस व्यक्ति को नहीं पकड़ सकते तो एक निरपराध व्यक्ति भी पकड़ जाएगा इसका मतलब ये जो फिंगरप्रिंटिंग इसकी खुद की एक पहचान जिस जैसे आधार कार्ड टाइप का वो भी ये ठीक नहीं है तो बेस्ट क्या है कि हम उसका एक सेल लेके उसके डीएनए को निकाल लें तो आप बोलोगे क्या डीएनए मेरा और किसी राम का श्याम का अलग-अलग है अलग-अलग हम सब इंसान हैं सब ह्यूमन है एक पर एक जैसे दिखते नहीं है इसका मतलब यहां पर कुछ लिखाई ऐसी होगी जो कि किसी भी व्यक्ति के लिए स्पेसिफिक होगी ये लिखाई को यदि मैं इसके डिटेल में मैं नहीं जा रहा हूं यदि मैं किसी तरह पढ़ लूं तो इस व्यक्ति का यह लिखाई दुनिया में और किसी के पास नहीं होगा तो यदि यह लिखाई इसकी मिलती है किसी मौका या वारदात में कोई कुछ होता है और किसी को आप पकड़ते हो तो यदि यह वाली लिखाई दोनों मैच करती है तो यही व्यक्ति वही व्यक्ति है यह पक्का हो जाएगा दिस इज कॉल्ड आइडेंटिटी तो किसी का बेस्ट आधार कार्ड क्या है उसका डीएनए पर आप इसको आधार कार्ड में जोड़ नहीं सकते इसलिए आधार कार्ड क्लोन हो जाते हैं पर आप इसको क्लोन नहीं कर सकते इसलिए वर्ल्ड में कई जगह पे डीएनए बैंक बनाए जाते हैं इस डीएनए की पहचान से आप किसी का पक्का पक्का आइडेंटिटी कर सकते [संगीत] हो इसका मतलब यही चीज इधर भी अपना सकते हो टीबी के बैक्टीरिया में भी अपना सकते हो एचआईवी में भी अपना सकते हो सबकी एक आइडेंटिटी होगी आपका एक आधार कार्ड होगा जिसमें कि डीएनए फिंगरप्रिंट होगा क्योंकि ये डीएनए में पढ़ रहे हैं वैसे ही जैसे फिंगरप्रिंट की वर्ल्ड्स को लाइन को पढ़ते हैं वैसा ही है इसलिए इसका नाम दिया गया है डीएनए फिंगरप्रिंट अदर वाइज ये डीएनए कोई फिंगर में नहीं रहता क्योंकि फिंगरप्रिंटिंग एक फॉरेंसिक में आइडेंटिटी के लिए यूज़ होती थी अपराधी पकड़ने के लिए तो क्योंकि डीएनए में भी एक लिखाई होती है तो उसको डीएनए फिंगरप्रिंट बोलने लगे इसका मतलब हर लिविंग ऑर्गेनिज्म का चाहे वो ह्यूमन हो चाहे बैक्टीरिया हो चाहे वायरस हो चाहे प्रोटोजोआ हो कोई भी हो उसका एक पक्की लिखाई होगी डीएनए फिंगरप्रिंट की अब यदि मैं किसी को खांसी चल रही है या किसी को बुखार आ रहा है और ठीक नहीं हो रहा है तो कुछ ना कुछ इंफेक्शन के कारण किसी ना किसी बैक्टीरिया वायरस के कारण वो बीमार है तो उसके ब्लड से या उसके खार से या उसके यूरिन से या फिर उसके सीरम से या फिर उसके पेट के एसाइटिक फ्लूइड से या फिर उसके सीएसएफ से यदि मैं कुछ लिक्विड निकाल लूं और उसको मैं सेंट्रीफ्यूज करूं तो मेरे को कुछ सेल मिलेंगे यह सेल इस ह्यूमन के होंगे जिसमें जो इनफेक्टेड है उस सेल के भीतर यह या तो टीबी कोई भी एक जिस जिसके कारण इसको बुखार आ रहा है बीमार है जो भी है इस सेल के भीतर होगा तो यह एक टीबी का बैक्टीरिया इधर बैठा हुआ है और इसके पास भी एक न्यूक्लियस है सेल के भीतर जैसे इधर है अब जब आप इसके पूरे डीएनए को निकालोगे तो इस व्यक्ति का भी डीएनए निकलेगा और जो भी है इसके भीतर उसका भी डीएनए निकलेगा हमको इस व्यक्ति से कोई मतलब नहीं है क्योंकि इसने कोई अपराध नहीं किया पर यह बैक्टीरिया वायरस जो भी है यह अपराधी है इसको डिस्टर्ब करने के लिए यह कौन है इसकी जो लिखाई है इसको हम हमारे पास जो लाइब्रेरी है हम उससे मैच करें तो कहीं एक जाके मैच होगा तो हम बता सकते हैं कि ये टीबी के बैक्टीरिया से मैच करती है मतलब यह टीबी का बैक्टीरिया इस व्यक्ति के बॉडी में है जिसके कारण यह बीमार है तो यदि है तो हम टीबी का स्पेसिफिक इलाज दे सकते हैं इसका मतलब यह जो इलाज देने की प्रक्रिया है यह इतनी स्पेसिफिक होगी कि आपको सीधा ड्रग देना है और ड्रग से यह ठीक हो जाएगा अदरवाइज आप ड्रग अप्लाई करते रहिए यह भी ट्राई करो वो भी ट्राई करो अल्टीमेटली किसी को यदि हेपेटाइटिस बी के कारण या फिर कोविड के कारण या फिर H1 एन1 के कारण बुखार है तो आप H1 एन1 का यदि फिंगरप्रिंट मिलता है कोविड का फिंगरप्रिंट मिलता है तो आप पक्का बता सकते हो कि इसको बुखार क्यों आ रहा है बीमार क्यों है डेंगू हुआ है अदर वाइज इसको डायग्नोसिस करना बहुत डिफिकल्ट होता है जो ह्यूमन ब्लड से एलाइजा से करते हैं वो स्पेसिफिक नहीं होता वो उतना फिंगरप्रिंट वाला नहीं होता इसलिए ये नॉन स्पेसिफिक है मतलब आप अंदाज कर रहे हो बट जब आप इसका डीएनए पता कर लेते हो तो ये अंदाज नहीं कर रहे ये स्पेसिफिक है इसका मतलब हम इस डीएनए टेक्नोलॉजी को ह्यूमन की बीमारी में जैसे किसी को सिकल सेल है तो सिकल सेल का फिंगरप्रिंट अलग होगा किसी को थैलेसीमिया है तो थैलेसीमिया का फिंगरप्रिंट अलग होगा किसी को ड्यूशन मस्कुलर डिस्टफी है वो अलग होगा हम यदि इसी टेक्नोलॉजी से इसको भी पहचान लें इसको पहचान ले तो हम इधर मरीज की बीमारी फैमिलियल हेरिडिटरी या फिर पिताजी से मिली माताजी से मिली वंशानुगत बीमारी या फिर ऐसा फिंगरप्रिंट चेंज जिससे कि कैंसर होता हो ये पता कर सकते हैं इसका मतलब ये डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की मेथड से डीएनए को पढ़ने के मेथड से पढ़ने का मेथड कैसा होता है मैं उसमें नहीं जा रहा हूं वो एक अलग लैब का विषय है पर यह समझने वाली बात है कि आप यदि इस आइडेंटिटी को पहचान लें तो आप मनुष्य की स्पेसिफिक आइडेंटिटी पहचान सकते हो हमें यदि लगता है कि यह व्यक्ति ने कोई अपराध नहीं किया पर यह बीमार है तो वो बीमारी वंशानुगत है तो कौन सी बीमारी है उसका पता लगा सकते हो तो यह जो मनुष्य में बीमारी पता करने का दूसरा कैंसर पता करने का कैंसर का टाइप पता करने का वंशानुगत बीमारी पता करने का डाउन सिंड्रोम पता करने का जो टेक्निक है उसको जेनेटिक डायग्नोसिस बोलते हैं और यहां पर हम जो कर रहे हैं यहां पर पेशेंट को कोई जेनेटिक बीमारी नहीं है कोई खानदानी बीमारी नहीं है कोई थैलेसीमिया नहीं है पर वह बीमार है क्यों क्योंकि उसको कोई इंफेक्शन हुआ है बुखार आ रहा है उसका वेट लॉस हो रहा है पहले तो अच्छा था अचानक कुछ बीमार हो गया किस वजह से स्टेप्टोककाई से है स्टेफिलोककाई से है दुनिया भर के बहुत सारे ऑर्गेनिज्म जो हैं वो हम पे अटैक करते हैं उस अटैक में यदि आप जीत जाते हो तो आप ठीक रहते हो यदि आप उस अटैक में बीमार पड़ते हो तो आपका इलाज होना चाहिए अब इलाज स्पेसिफिक ना होके आपको एंटीबायोटिक कोई दे दिया आपका हाई एंड एंटीबायोटिक दे दिया एंटी वायरल भी दे दिया कॉम्बिफ्लेम दे दिया बुखार कम करने की दवाई दे दी यह चलता रहता है जब तक बॉडी अपने आप को प्रोटेक्ट करके इससे जीत नहीं जाती है तब तक आदमी बीमार रहता है इसके बजाय यदि हम इस व्यक्ति में किसने अटैक किया उसको यदि पता कर ले इस चीजों के फिंगरप्रिंट पता करके तो हम जो पैथोलॉजी है जो उसकी बीमारी है उसको पिन पॉइंट कर सकते हैं स्पेसिफिक 100% बोल सकते हैं ये जो मेथड होता है इसको बोलते हैं मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी डीएनए के कण को मॉलिक्यूल बोलते हैं तो मॉलिक्यूल तक जब हम जाते हैं उसको पता करके जब हम पैथोलॉजी करते हैं तो उसको बोलते हैं मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी इसका मतलब ऐसे डॉक्टर मेडिसिन वाले या पीडियाटिशियन वाले या गायनी वाले या जो भी है जो पेशेंट का इनफेक्शन का ट्रीटमेंट करते हैं जो पेशेंट का बुखार का इलाज करते हैं जो पेशेंट का वेट लॉस हो रहा है या बीमार पड़ रहा है या फिर कुछ हो रहा है जिसमें लगता है कि किसी वायरस या बैक्टीरिया के कारण यह बंदा बीमार है कौन सा तो इसके डिफरेंट पैनल हैं यदि खांसी चल रही है तो रेस्पिरेटरी पैनल है यदि बुखार नहीं उतारा है तो सेप्सिस का पैनल है तो इसमें बहुत सारे बैक्टीरिया वायरस सबका एक साथ फिंगरप्रिंट निकाल के आप उसकी पक्की डायग्नोसिस कर सकते हो इसको बोलते हैं मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी फॉर इंफेक्शन और यही टेक्निक जब डीएनए में ह्यूमन डीएनए में हम करते हैं तो ह्यूमन डीएनए में डिजीज डायग्नोसिस करने के लिए जब हमारे पास में थैलेसीमिया सिकल सेल बहुत सारे पीडियाटिक डिसऑर्डर्स होते हैं जो कि अगले बच्चे में भी होने का खतरा है तो जो बच्चा जीवित है उसको कौन सा बीमारी हुआ है उस बीमारी का पक्का फिंगरप्रिंट निकालो यदि वो है तो दोबारे में होगी कि नहीं वो तो ये जो बीमारी आइडेंटिफाई करने का जो टेक्निक है इसको बोलते हैं जेनेटिक डायग्नोसिस अब ये दोनों जो चीजें होती हैं इसके लिए आपको इसका भी डीएनए निकालना पड़ेगा इसका भी डीएनए निकालना पड़ेगा इसका मतलब आपके पास में डीएनए निकालने की मशीन होना चाहिए डीएनए की कॉपी बनाने की मशीन होना चाहिए पीसीआर और इसमें जो लिखाई है उसको पढ़ने का भी मशीन होना चाहिए उसको बोलते हैं एनजीएस तो आइडियल जीनोमिक्स में हम ये वाला काम और यह काम रेगुलरली कर रहे हैं हम यह भी कर सकते हैं विद आइडियल फर्टिलिटी जो हम फर्टिलिटी क्लीनिक चलाते हैं और आईवीएफ करते हैं हम एक भ्रूण बनाएं और उस भ्रूण में यदि कोई बीमारी है कि नहीं तो हम उस बीमारी को भी इसके सेल में से निकाल के पता कर सकते हैं तो उसको बोलते हैं प्री इंप्लांटेशन जेनेटिक टेस्ट मतलब हम एक डिजीज फ्री भ्रूण भी बिठा सकते हैं ताकि महिला को वो बीमार बच्चा हो ही ना तो ये एक बेसिक कांसेप्ट है जेनेटिक डिजीज डायग्नोसिस करने का हमारे पास में थ्रू आइडियल फर्टिलिटी जिसका जिसमें कि हमने आइडियल जीनोमिक्स स्टार्ट किया है जिसमें हम एनजीएस लैब नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग लैब है पीसीआर मशीनें हैं लाइब्रेरी प्रिपरेशन है अ उसमें हम इनफेशस पैथोलॉजी देखने के लिए हमारे पास में पूरा आइडेंट पूरा व्यवस्था है प्लस जेल इलेक्ट्रोपोरेसिस सिस्टम है पूरी लैब हमारे पास में यूपीएस से पूरा कंट्रोलोल्ड है हम डीएनए स्टोर कर सकते हैं यदि बाद में कोई चाहे तो अपने डीएनए का जांच कराने के लिए तो ये एक बेसिक ओवरऑल एक तरीका है डीएनए का जांच करने का इनफेक्शन में और जेनेटिक डिसऑर्डर में थैंक यू वेरी मच

2 Comments

  1. सर आप की हॉस्पिटल का एड्रेस बताएं जबलपुर मै किस स्थान पर है चेक करानें आना है

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