#japjisahib #sikh #punjab #uk #bedford #gurunanakdevji #gurunanak #sikh #bedford #khalsa #punjab #sikhism #sikhi #sikhpanth #sikhs #bedfordshire #guru #gurugobindsinghji #motorcycle #motorbike #motorcycles #royal #enfield #meteor #royalenfieldmeteor #royalenfieldmeteor350 #royalenfield #bike #biker #bikeride #bikes #bikerider #bikestunt

सतनाम श्री वाहेगुरु साहिब जियो गुरु गरीब निवाज वाहेगुरु साहिब जियो एक ओंकार सतनाम करता पुरख निर्भर वैर अकाल मूरत अजूनी सभ गुर प्रसाद जप आद सच जुगा सच है भी सच नानक सच सोच सोच न होवई ज सोची लख बार चुप चुप न होवई ज लाय रहा लिवतार खिया ख न उतरी ज

बन्ना पुरिया ार सह सनपा लख होहे त न चल ना किव सरा होई किव क ट पाल हुकम रजई चलना नानक लिख्या नाल हुकम होव आकार हुकम न कया जाय हु होव जी हुकम ले बयाई हुकम उतम नीच हुकम लिख दुख सुख पाई एकन हुकम बस हुक सदा

ई हुकम अंदर सब को बाहर हुकम ना कोय नानक हुकम जे बुझे तम कहे न कोय गाव को ताण होव किस ताण गाव को दात जाने ण गावे को गुण बयाया चार गावे को विद्या बचार गावे को साज करे तन खेह गावे को जी ले फिर

देह गावे को जाप दिस दूर गावे को ख हादरा ह दूर कथ ना कथी ना आवे ट कथ कथ कथी कोटी कोट कोट देन द दे लदे थक पाहे जुगा जुगत खाही खाहे हुकम हुकम चलाए राहो नानक बिगस बेपरवाह साचा साहिब साच ना आय पाखिया भाव अपार आख मंग दे देह दात करे

दातार फर के अ रख है जित दिस दरबार मोह के बोलन बोलि जित सुन रे प्यार अमृत वेला सच नाव बयाई बचार करमी आवे कपड़ा नजरी मोख दवार नानक एव जाय सब आपे सचर थाप ना जाए कीता ना होए आपे आप निरंजन सोय जिन सेव्या न पाया मान नानक गाविया गुण

निधान गाविया सुनि मन रखी ऊ दुख पर हर सुख र ल जाए गुरमुख नाद गुरमुख वेद गुरमुख रह समाय गुरु ईश्वर गुरु गोरख ब्रह्मा गुरु पार्वती माई जे ह जाना आका नाही कहना कथन न जा गुरा एक देह बुझाई अबना जिया का एक दाता

हो मैं विसर न जाई तीरथ नावा जे तिस पाव बिन भाने के नाय करी जेती सर पाई ब बिन करमा के मिले ल मत वि रतन जवाहर मानक ज गुरु की स सुनी गुरा दे बई अपना जिया का एक दाता सो न जाय जे जुग

चारे आरज होर द सुनी होय नवा खंडा विच जाण नाल चले सब कोय ंगा ना रखाय क जस कीरत जग ले जे तिस नजर न आव त बात न पुछ के कीता अंदर कीट का दोसी दोस धरे नानक निर्गुण गुण करे गुणवंत गुण दे तेहा कोई न सझ जे

तिस गुण कोय करे सुण सिध पीर सुर नाथ सुण धरत धवल आकास सुण दीप लो पाताल सुनया पोहे न सक काल नानक भगता सदा गास सुण दूख पाप का नास सुण ईसर बमा इंद्र सुण मुख साला हन मंद सुण है जोग जुगत तन भेद सुण है सासत सिमरत वेद नानक भगता सदा

विगा सुण दूख बाप का नास सुण है सत संतोख गन सुण है अठ सठ का इस्नान सुण है प प पावे मान सु लागे सह धन नानक ता सदा गास सु ख पाप का नास सुन है सरा गुणा के गाह सुण है सेख पीर पादशाह सुन अंध पाव राहो

सुने हाथ वै सगाह नानक भगता सदा बिगास सुन है दूख पाप का नास मनने की गत कही न जाए जे को कहे पिछे पछताय कागद कलम न लिखन हार मन्ने का बह करन बचार ऐसा नाम निरंजन हो ज को मन जाने मन को मन सुरत हो मन बुद्ध मन सगल न की

सुध मन मोह चोटा न खाय मने जाम क साथ न जाए ऐसा नाम निरंजन हो को मन जा मन कोय मन मारग ठाक न पाय मन पास प्रग जाए म माघ न चले पंथ मने धम सेती स बं ऐसा नाम निरंजन होय जे को मन जाने मन कोय मन पाव मुख दवार

मन पवार साधार मन त तारे गुरसिख मन नानक भव ना ख ऐसा नाम निरंजन होय जे को मन जाने मन कोय पंच परवान पंच प्रधान पंचे पाव दरग मान पंचे सु दर राजन पंचा का गु एक ध्यान जे को कहे करे बचार करते क करण नाही सु

मार ल धर्म दया का पूत संतोख थाप रख जिन सूत जे को बुझे होव सचर धवल ऊपर केता ार धरती होर पर होर र तिस ते भार तले कवन जोर जी जात रंगा के नाव सबना लिख्या बुड़ी कलाम एहो लेखा लिख जाने कोय लेखा लिख्या केता

होय केता तान सुवाल रूप केती दात जाने कौन कूत कीता पसा एकको कवा ते होए लख दरियाओ कुदरत कवन कहा विचार वार न जावा एक बर जो ध पावे सा भली का तू सदा सलामत निरंकार असंख्या असंख्या विचार असंख्या तार कुदरत कवन कहा विचार वार न

जाव एकवार जो तुध भावे साई भली कार तू सदा सलामत निरंकार असं मूरख अंध र असखम खोर असं अमर कर जाहे जोर असंख्या कमा है असंख्या कूड़े फरा है असंख्य [संगीत] सिर करहे ार नानक नीच कहे विचार वारिया न जावा एक वार जो तुध पाव साई भली का ू सदा सलामत निरंकार

असंख्य अखरी नाम अखरी साला अखरी ज्यान गीत गुण गाह अखरी लिखन बोलण बाण अखरा सरस बखा जिन लिखे तिस सरना जिव फरमाए तव तेव पाहे जेता कीता तेता ना बि नाव ना को था कुदरत कवन क विचार वार न जावा एकवार जो ध पावे साई भली का ू सदा सलामत

निरंकार भरिए हथ पैर तन दे पानी धोते उ तरस खे मूत पती कपड़ होय दे साबु ल ओ धोय रिय मत पापा क संग ओ धोप नाव क रंग पुन्नी पापी आखन नाहे कर कर करणा लिख ले जाह आपे बीज आपे ही खाओ नानक हुकम आवो

जाहु तीरथ तप दया दत दान जे को पावे तिल का मान सुनया मन मन कीता पाओ अंतर गति तीरथ मल नाओ सब गुण तेरे मैं नाही कोय बिन गुण कीते भगत न होय स अस्त आथ बाणी बरमा सत सुहान सदा मन ओ कवन सो वेला

भगत कवन कवन त कवन वार कवन सेती मा हो कवन जित होवा आकार वेल न पाइया पंती जि होव लेख पुराण बगत न पायो कादिया जे लिखन ले कुराण त वार न जोगी जाने तुमा हो ना कोई जा करता सृष्टी को साजे आपे जाने सोई किव

कर आखा किव साला कियो बरनी किव जाना नानक आखन सब को आख एक दू एक सयाना वडा साहिब व ना कीता जा का होव नानक जे को आप जाने अ गया ना पाताल पाताल लख आगासा आगासन डक पाल के वेद कहन एक वात हह अार

कहन कते बासलु एक धात लेखा होए ता लिखि लेख होए बिनास नानक वडा आखिया आपे जाने आप लाही साला ती सुरत न पाई नदिया तवा पवे समुंद न जानिए समुंद साह सुल्तान गिरा सेती माल तन कीड़ी तुल न होनी जेस मनो न बसरे अंत न जती कहन न अंत अंत करण दे न

अंत अंत न बखन सुन न अंत अंत न जाप क्या मन मंत अंत न जाप कीता आकार अंत न जापे पारावार अंत कारण केते बिल लाहे ता के अंत न पाए जाहे एहो अंत न जाने को बहुता कहिए बहुता हो वडा साहिब ऊचा था ऊचे ऊपर ऊचा

नाऊ एव ऊचा होव कोय त ऊचा को जाने सोय जेव आप जाने आप आप नानक नरी कर्मी दात बहुता कर्म लिखिया ना जाए वडा दाता तिल ना त माए केते मंगे जोध अपार केतिया गनत नहीं विचार केते खप तुटे बेकार केते ले ले मुकर पाहे केते मूरख

खाही खाहे केत दूख भूख साद मार ए भे दात तेरी दातार बंद कलासी भाने होए हो राख न सक कोय ज को खाए खण पाय ओ जाने जतिया मोहे खाय आपे जाने आपे दे आख से भे केई के किसनो बख सिफत साला नानक पातशाही पातशाह अमुलुरु है अमुलुरु

अमल तुल अमल परवान अमल बख्शीश अमल निशाण अमल कर्म अमल फरमान अमु अमल आख्या न जाय आख आख र लिव लाय आख वेद पाठ पुराण आख पड़े कर ब्याण आख बर्मे आख इंद आख गोपी त गोविंद आख ईसर आख सिध आख केते कीते बुध आख दान आख देव आख सुर नर मुन जन

सेव केते आख आखन पाहे ते कहे कहे उठ उठ जाए ते कीते होर करहे ख न सके केई के जेव भावे तेव होय नानक जाने साचा सोय ज को आख बोल बगा ता लिखि सिर गावरा गावा सो दर केहा सो करर केहा जित बहे सर्ब समाले वाजे नाद अनेक असं

केते बावन हारे केते राग परी सयो कहिन केते गावन हारे गावे तोन पवन पानी बसंतर गावे राजा धर्म द्वारे गावे चित गोप ख जाने लिख लिख धर्म विचारे गावे ईर बरमा देवी सोहन सदा सवारे गावे इंद दसन बैठे देवते नाले गावे सिध समाधि अंदर गावन साध विचारे गावन जति सती संतोख गावे वीर

करार गावन पंडित पढन रखी सर जुग जुग वेदा नाले गावे मोहनिया मन मोहन सुरगा मछ प आले गावन रतन उ पाए तेरे अठ सठ तीर्थ नाले गाव जोध महा बल सूरा गाव खानी गाव खंड मंडल बर भंडा कर कर रखे धार यही धनो गाव जो तुध पावन रते तेरे भगत र साले

और केते गावन से मैं चित न आवन नानक क्या बचारे सोई सोई सदा सच साहिब साचा साची नाई ऐ भी होसी जाय न जासी रचना जिन रचाई रंगी रंगी भाती कर कर जनसी माया जिन उपाई कर कर ख कीता अपना जिव तिस द वडियाई जोस भावे

सोई करसी हुकम न करना जाई सो पात साहो सहा पात साहिब नानक रह रजाई मुंदा संतोख सर्म पत चोली ध्यान की कर विभूत पंथा काल कुवारी काया जुगत डंडा प्रतीत आई पंथी सगल जमाती मन जीत जग जीत आदेश आदेश आद अनील अनाद अनाहत जुग जुग को वेस भगत ज्यान दया

भंडारण घड़ कड़ बजे नाद आप नाथ नाथ सब जा की रिध सिद्ध अरा साद संजोग बजोग का चलावे लेख आवे भाग आदेश तिस आदेश आद अनील अनाद अनाहत जुग जुग एक वेस एका माई त ब आई न चेले परवान एक संसारी एक भंडारी एक ल

दीवान जब तिस भाव चलाव जि होव रमान े ना नज न आव ब य बण आदेश तिस आदेश आध अनील अनाद अनाहत जुग जुग एक को वेस आसन लोय लोय पंडार जो कुछु पाया सो एका वार कर कर बेख सर्जन हार नानक सचे की साची कार आदेश तिस आदेश आद

अनील अनाद अनाहत जुग जुग एक वस एक दूजी भाव लख होहे लाख लख सीस लख लख ड़ा आख एक नाम जगदीस त राहे पद पड़िया चढ़ होए कीस न गला आकाश की की आए रीस नानक नजरी पाई कूड़ी कड़ ठस आखन जोर चुप न

जोर जोर न मंग देन न जोर जोर न जीवन मरण न जोर जोर ना राज माल मन सोर जोर न सुरती ज्ञान विचार जोर न जुगती छुट संसार जिस हथ जोर कर बख सोय नानक उतम नीच ना कोय राती रती थिति वार पवन पाण अगनी पाताल

तस वित धरती ताप रखी धर्म साल तस वित जी जुगत के रंग न के नाम अनेक अनंत करमी करमी होए बचार सचा आप सचा दरबार थ सो पंच परण नरी करम पव ण कच पका थ पाय नान गया जाप धम खंड काहो धर्म जन खंड का आखो कर्म केते

पवन पानी बसंतर केते महेस केते ब्रम टत कड़िया रूप रंग के वेस केतिया कर्म भूम मेर केते केते धू उपदेश केते इंद चंद सूर केते केते मंडल देश केते सिद्ध बुध नाथ केते केते देवी वेस केते देव दानव मुन केते केते रतन समुंद केतिया खानी केतिया बाणी केते पात

नर केतिया सुर सेवक कते नानक अंत न अंत ज्ञान खंड में ज्ञान प्रचंड थ नाद विनोद कोड अनंद सर्म खंड की बाणी रूप तथ टत ड़ बहुत अनूप ता किया गला कथियाई जे को कहे पिछ पछताय तिथ ड़ सुरत मत मन बुध थ ड़ सधा की

सुध कम खंड की बाणी जोर थ होर न कोई होर थ जोध महा बल सूर तिन मह राम रह भार पूर तिथ सीतो सीता महमा माय ता के रूप न कथन जाहे ना ओहे मरे न ठगे जाहे जिन क राम बस मन माहे थ भगत बस केलो करहे अनंद सचा मन सो

सचखंड बस निरंकार कर कर ख नजर निहाल तिथ खंड मंडल बर भंड जे को कथ ता अंत ना अंत तिथ लो लो आकार जब जब हुकम तव तव का बेख बिगस कर बचार नानक कथन करडा सार जत पा हारा धीट सुनर अहरण मत वेद हथियार खलो अगन

तपता भांडा पाओ अमृत तित टाल ड़ सबद सची टकसाल जिन को नदर करम तिन कार नानक नदर नदर निहाल स्लोक पवन गुरु पाणी पिता माता धरत महत दिवस रात दोय दाई दाया खेले सगल जगत चंग आइया आइया वाचे धर्म हूर करमी आपो अपनी के नेड़े के दूर जिनी नाम धया गए मकत

काल नानक ते मुख उजले केती छुटी नाल वाहेगुरु

1 Comment

Leave A Reply