12 नवंबर 1996 को शाम करीब 6:30 बजे एक प्लेन दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से सऊदी अरब के लिए टेक ऑफ करता है उसी समय एक चार्टर्ड प्लेन कजाकिस्तान से दिल्ली की ओर उड़ान भरता है कुछ समय बाद सऊदी अरब वाला प्लेन एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से 14000 फीट की ऊंचाई पर उड़ने की परमिशन मांगता है और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर इसे परमिशन दे देता है कजाकिस्तान वाला प्लेन भी उसी रूट से आ रहा था इसीलिए एयर ट्रैफिक कंट्रोलर इसे 15000 फीट की ं पर उड़ने को कहता है लेकिन दिल्ली से 100 किलोमीटर दूर चरखी दादरी गांव में आसमान से लोहे के टुकड़े बरसने लगते हैं क्योंकि यह दोनों प्लेन आपस में टकरा चुके थे इन्वेस्टिगेशन के बाद पता चलता है कि कजाकिस्तान वाले पायलट को इंग्लिश नहीं आती थी और उसने इंग्लिश को अपनी लोकल लैंग्वेज में ट्रांसलेट करने के लिए एक रेडियो लगा रखी थी इस कारण वह मैसेज को सही से समझ नहीं सका और 15000 फीट की ऊंचाई पर उड़ने की बजाय 14000 फीट पर आ गया जिसकी वजह से

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