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आजकल मुझे लगता है कि मेरी साइकिल के सितारे गर्दिश में है क्योंकि आए रोज इसका कोई ना कोई ड्रामा चलता रहता है। लेकिन मुझे गुस्सा तब आता है जब यह काम के दौरान ऐसा कोई ड्रामा करती है और खासतौर पर तब जब मैं घर से बहुत दूर होता हूं। आज बारिश का मौसम था और मैं काम पे निकला हुआ था। बारिश वाले दिन काम अच्छा होता है। यह बात तो मैं भी मानता हूं कि पाकिस्तान में साइकिल या मोटरसाइकिल पंचर होना एक मामूली सी बात है। लेकिन यहां पे पंचर होना कोई मामूली बात नहीं है। पाकिस्तान में जगह-जगह आपको पंचर वाली शॉप्स मिल जाएंगे जो कि आधी रात तक खुली होती है। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। यहां पहले आपको अपॉइंटमेंट लेनी पड़ती है जो कि आपको एक या दो दिन बाद की मिलती है। अब आप लोग यह सोच रहे होंगे कि यहां के इस रोड तो साफ है। फिर यहां पर पंचर किया। यहां लोग शराब पीकर जब टोन हो जाते हैं तो वह बोतलें रोड्स के ऊपर तोड़ देते हैं। उन्हें खुद नहीं पता होता वो क्या कर रहे हैं। इसी तरह आज मैं एक अंडरपास से गुजर रहा था 30 की स्पीड से तो पीछे वाले टायर में एक शीशा लगा। लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया लेकिन थोड़ी ही देर में मुझे सुरसुर की आवाज आने लगी। आवाज सुनते ही मुझे समझ आ गई कि कांड हो गया है। मैं अल्लाह से दुआ करने लगा कि पंचर ना हुआ हो नहीं तो पकोड़े लग जाने क्योंकि मैं घर से तकरीबन 4 कि.मी. दूर था। और मजे की बात आज मैं पंचर वाला सामान भी साथ नहीं लाया था। अंडरपाथ से बाहर निकला। साथ ही फुटपाथ पे मैंने साइकिल लगाई और वही हुआ जिसका डर था वो था पंच। एक तो इस साइकिल का वजन 45 से 50 किलो है। हल्की साइकिल होती तो उसे कंधे पर उठाकर घर ले जाता। पहले तो उसे रेड़ना शुरू किया। तकरीबन 1 कि.मी. के बाद पीछे वाला पहिया टोटली जाम हो गया। जब देखा तो ट्यूब टायर से बाहर निकल कर गारियों के साथ अच्छे से लिपट गई। अब मेरे पास ट्यूब काटने के लिए कुछ नहीं था। जब तक ट्यूब ना काटूंगा तब तक साइकिल नहीं चलेगी। तो साथ ही मैं पब्लिक टूल ढूंढने लगा। यहां पे कुछ जगह पर पब्लिक टूल बनाए हुए हैं जहां पर आप फ्री में औजार ले सकते हैं और अपनी साइकिल ठीक कर सकते हैं। वहां से मुझे एक पेंचकस मिला और साथ ही मुझे एक बंगाली दोस्त मिल गया जिसने ट्यूब काटने में मेरी मदद की। अभी मैं घर से तकरीबन 3 कि.मी. दूर था और यहां आई दूसरी मुसीबत वो यह थी कि टायर बड़ा था और उसने रिम को छोड़ दिया। अब पहिया तो घूम रहा था लेकिन उस पर जोर ज्यादा लग रहा था। थोड़ी दूर तक घसीटने के बाद मुझे याद आया कि साइकिल के अंदर एक ऑटो का बटन है। ऑटो का बटन दबाने के बाद वो साइकिल मेरे साथ-साथ चलने लगी। इससे मुझे इतना फायदा हुआ कि मुझे जोर नहीं लगाना पड़ा। जैसे-जैसे मैं चल रहा था वो मेरे साथ-साथ चल रही है। 4 कि.मी. का सफर मैंने तकरीबन डेढ़ घंटे में पूरा किया। घर आकर मैंने सुकून का सांस लिया और हालत मेरी पतली हो चुकी। साथ ही मैंने एक न्यू टायर और एक ट्यूब आर्डर की जो कि मुझे एक हफ्ते बाद मिली। तब तक साइकिल इसी मुर्दा हालत में खड़ी रही। इसका एक टायर और ट्यूब तकरीबन 50ों का आता है जो मुश्किल से दो महीने चलते हैं। मिलते साथ ही मैंने साइकिल का ऑपरेशन शुरू किया और न्यू ट्यूब और टायर चढ़ा। साइकिल तो मैं खोल ली। अभी यहां दूसरा मसला शुरू हुए। अब वो था पहिए को दोबारा चढ़ाना। वो मुझसे चढ़ नहीं रहा था। जो चैन थी वो गरारियों के साइड पर फंस गई। जिसकी वजह से एंगल टेढ़ा हो गया। एंगल टेढ़ा होने की वजह से टायर अपनी पोजीशन पर नहीं आ रहा। भाई पुर्तगाल गया हुआ था। भाई आता तभी इस साइकिल को ठीक करता है। तब तक यह इसी हालत में खड़ी थी। भाई आर उसने साइकिल को ठीक किया और आखिरकार अब इसका ड्रामा खत्म हुआ। अब यह तकरीबन 2 महीने चल जाएगी। वीडियो अच्छी लगे तो लाइक, शेयर लाजमी करना एंड फॉलो फॉर मोर।