Cap d’Agde Naturist Village, where the naturist lifestyle is celebrated. Discover the philosophy of naturism and their beliefs.
Nangay Logu ka Shehar / Cap d’Agde Naturist Village Facts and Reality / Shoaib Ashraf

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नाजरीन मोहतरम दुनिया में एक ऐसा शहर भी पाया जाता है जहां के तमाम बाशिंदे हर वक्त नंगे रहते हैं जी हां बच्चे बूढ़े औरतें लड़कियां सब नंगे रहते हैं यकीनन आप सोच रहे होंगे कि मैं किसी अफ्रीकी मुल्क की बात कर रहा हूं या फिर किसी जंगली की बले की जो नई तरक्की याफ्ता दुनिया से वाकफ नहीं है इसलिए आज तक पुराने तरीकों से जिंदगी गुजारे हैं और इसलिए वह नंगे रहते हैं लेकिन दोस्तों ऐसा नहीं है यह लोग किसी आदिवासी तबके से तलक नहीं रखते यह अफ्रीका के सेहरा उं के बाशिंदे भी नहीं यह भारत के नागा या जैनी साधु भी नहीं है यह जाहिल और अनपढ़ गुवार तबके से तलक नहीं रखते बल्कि आज की महजब दुनिया के बाशिंदे हैं और पड़े लिखे हैं नीज अमेरिका यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के महज बाशिंदे हैं आज हम आपको इस शहर का नाम भी बताएंगे और इस सोच के बारे में कि वह नंगे क्यों रहते हैं मुफीद मालूमात से आगाह करेंगे नाजरीन मोहतरम आप सोच स रहे होंगे कि इतने पढ़े लिखे तबके से तलक रखने वाले लोग आखिर इतने बेशर्म काम में क्यों मलव हैं यह नेचुरलिज्म का नजरिया क्या है दुनिया में पहली बार फ्रांस में 1778 ईसवी में इस ख्याल ने जन्म लिया कि इंसान को फितरत प्रस्त होना चाहिए यह इन इंसानों की सोच थी जो शहरी जिंदगी की हलचल से आज आ चुके थे और एक फिी जिंदगी गुजारना चाहते थे ऐसे कुछ लोगों ने एक फित्री माहौल में जीना शुरू किया वह पेड़ों पौधों और मजहिर फितरत के साथ रहना पसंद करते थे उन्हे में कुछ लोगों ने मजीद फिी जिंदगी गुजारने के इरादे से नंगे रहना शुरू कर दिया इस सोच को तो इब्तिदा में कुछ खास कबूलियत नहीं हासिल हुई मगर जैसे-जैसे इंसान ज्यादा हलचल भरी और तनाव से पुर जिंदगी गुजारने का आदी हुआ उसे उस जिंदगी से फरार की चाहत भी उसी कदर ज्यादा होती गई और इस नजरिए को फरोग मिलने लगा कि आदमी को जानवरों की तरह ही एक कुदरती माहौल में जीना चाहिए नीज उसे वैसा ही होना चाहिए जैसा कि उसे खुदा ने दुनिया में भेजा था इस सोच ने नेचुरलिज्म या न्यूडिज्म को जन्म दिया उसे हम उर्दू में फितरत प्रस्ती या रियायत परस्ती कह सकते हैं नेचुरलिज्म की इस्लाह पहली बार 1778 ईसवी में फ्रांस में इस्तेमाल हुई अब हम आपको नगो के शहर लिए चलते हैं इस शहर का नाम कैप डी एज है जो फ्रांस के साहिली शहर माउंट पैलियर के करीब वाकया है दुनिया में और भी इस नो की जगह हैं मगर इसे दुनिया का सबसे बड़ा नंगू का शहर करार दिया जाता है कैप डी एस सायर समुंद्र पर वाकया है और हर साल गर्मियों में 500 से जायद सया यहां आते हैं जिन्हें इसर में दाखल होने से कबल ही कपड़े उतारने पड़ते हैं कैप डी एज में बैंक सुपरमार्केट एनक्स हेयर ड्रेसिंग और पोस्ट ऑफिस जैसी दुकानें और दफा तर मौजूद हैं और इन तमाम दुकानों और दफत का अमला और उनके सारफ भरना होते हैं यहां एक तरफ तो लोगों का भरना रहना लाजमी करार दिया गया है और दूसरी तरफ बाहर से आने वाले सियाओ से भरना हालत में घूमने का मजा लेने के इवज 6 पाउंड टैक्स भी वसूल किया जाता है मगर यहां भर ना होने का यह मतलब नहीं कि यहां कानून नहीं यहां जो शख्स भी किसी गैर समाजी रवैए का मुजहरा करता है उसे जेल का मुंह भी देखना पड़ता है और जुर्माना भी किया जाता है यह शहर 1960 ईसवी में बसाया गया था बतान अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक यहां आने वाले सयाह उसकी तारीफ करते नहीं थकते और उसे दुनिया की बेहतरीन जगह करार देते हैं दुनिया में नेचर कितनी तादाद में है इस तलक कोई ठोस मालूमात दयाद नहीं है अलबत्ता इंटरनेट पर इनकी तादाद 40 मिल तक बताई गई है जो मशकुक ही लगती है इंटरनेट पर मौजूद मालूमात के मुताबिक अमेरिका की स1 फी आबादी नेच है इस सर्वे के मुताबिक इनमें 54 फीसद रिपब्लिकन पार्टी के हामी हैं जबकि 45 फीसद डेमोक्रेट हैं और 1 फीसद आजाना सियासी सोज रखते हैं रियानी पस्तु में जाहिल और अनपढ लोग बिल्कुल नहीं है इनमें बेहतर अफराद बहुत ज्यादा पढ़े लिखे हैं यह कानून साज हैं कानून द है जज हैं प्रोफेसर हैं इंजीनियर हैं सरकारी ऑफिसर इलेक्ट्री श पंबर और ट्रक ड्राइवर भी हैं दोस्तों नीयत प्रश्नों के अकाय तो अजीबोगरीब हैं ही साथ में उनकी मतक और दलाल भी अजीब है नेचर्ज या न्यूडिज्म के मानने वाले आमतौर पर ईसाई होते हैं मगर उनमें एक हा फीसद यहूदी भी हैं उनका मानना है कि इंसान इस दुनिया में नंगा आता है पैदा होने वाले बच्चे के जिस्म पर कोई लिबास नहीं होता लिहाज इंसान की फिी हालत यही है उसे उसी हालत में होना चाहिए आदम और हव्वा को अल्लाह ने नंगा पैदा किया और उन्हें इसी हालत में जमीन पर उतारा उसी तरह ईसा को जब सली दी गई तो वह बे लिबास थे नीज जब वह दोबारा अपनी कब्र से जिंदा होकर बाहर आए तो अपना कफन कब्र में ही छोड़ आए थे नंगे रहने वाले इन लोगों की दलील है ईसाइयत के इब्तिदा हजार बरस तक लोग चर्च में भर ना जाते थे ज्यादा ईसाई धर्म के मानने वालों की असली हालत यही है और तजब इसमें नहीं होना चाहिए कि एक ईसाई नंगा रहता है बल्कि तजब इसमें होना चाहिए कि एक असाही कपड़े पहनता है ये फिरका क्रिसमस से एक दिन पहले खास तौर पर जमा होता है और अपनी रियायत की फजीलत में तकरीरें करता है इस फिरके का मानना है कि इंसान एक दूसरे की इज्जत उसके लिबास की बुनियाद पर करता है मगर यह गलत है लोगों को एक दूसरे का एहतराम उसकी शख्सियत और इंसानियत की बुनियाद पर करना चाहिए रियायत प्रस्ती इंसान को इंसान के एहतराम करना सिखाती है ना कि उसके लिबास का तो दोस्तों यह थे नंगू के शहर के बारे में कुछ हका आपके ख्याल में कुरिया नियत प्रस्तों के दलाल में कितना दम है क्या इंसान को शहरी हलचल और परेशानियों से भाग कर इयार कर लेना चाहिए या उसे बेल बास होकर जंगलो में रहना चाहिए कमेंट बॉक्स में अपनी आरा से जरूर नवाज जाएगा

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