अहमद फराज ने कहा था मुंतज कब से तहर है तेरी तकरीर का बात कर तुझ पर गुमा होने लगा तस ये भी गालिब की जमीन है नक्श फरियादी है किसकी शोकी य तहरीर का अजी है पैरहन सब प करे तसक

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